Mon. Oct 3rd, 2022

Waste वर्तमान में सबसे बड़ा संकट बना हुआ है. विश्व के कई देशों ने  काफी अच्छे तरीके से सुव्यवस्थित किया है. रीयूज रीसाइकिल कैसे कांसेप्ट को बेहतर तरीके से अपने देशों में स्थापित किया है. इससे कई देशो को ईस्ट के संकट से भी निजात मिला है. परंतु सभी का यूज़ रीसाइकिल करना संभव नहीं है. वेस्ट का कुछ सालों से  व्यवस्थित तरीके से उपयोग किया जाने लगा है. परंतु अब इस क्षेत्र में एक कदम और आगे बढ़ाते हुए Energy के उत्पादन किया जाने का प्रयास किया रहे हैं. Waste to Energy Technology(WET) बेहतर बनाने में अभी बहुत रिसर्च चल रही है सभी देश मिलकर इसको  का बेहतर स्त्रोत बनाने की ओर अग्रसर हैं. कुछ क्षेत्रों में इस पर कार्य शुरू हो चुका है. 

इसमें और अच्छे परिणाम प्राप्त करने के लिए अभी और रिसर्च और एक्सपेरिमेंट जारी हैं. हालांकि टेक्नोलॉजी के अपने फायदे और नुकसान. इंडिया में अगरतला बल कॉर्पोरेशन की एक सर्वे के अनुसार 62 million tonnes अर्बन एरिया से आता है. और फोन में से 80% किसी डंपयार्ड में बहुत अस्वच्छ  और अव्यवस्थित तरीके waste dump से किया जाता है.

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    वेस्ट टू  एनर्जी अच्छा या बुरा (Waste to Energy Good or Bad )

     किसी एनर्जी को उत्पादन करने में नकारात्मक परिणामों को भी ध्यान मे रखना पड़ता. एनर्जी प्रोडक्शन का प्रभाव नेचर और हेल्थ या वातावरण पे पड़ता है. वर्तमान में यूरोप में इसे 80-100 ton का कचरा जलाया जाता है. Waste Incineration को अक्सर हम अपने कचरे कि समस्या का हल मानते है . और यूरोप में कुछ राज्य कुछ लाने में इन्वेस्टमेंट की उम्मीद कर रहे हैं. कब कचरे की अपशिष्ट को जलाकर इस प्रकार उसे खत्म करना एक को खत्म करने का बेहतर तरीका माना जाता है. परंतु इन पर किए गए शोध ध्यान में रखा जाए तो पता चलता है . वेस्ट को जलाना एक हानिकारक waste management system है.

    WET Technology

    वेस्ट को जलाना बेकार है (incineration of waste is wasteful)

     भारत या अन्य देशों में कचरे में कागज plastics प्लास्टिक फिल्म्स, कांच, मेटल ऐसी सामग्रियां  में शामिल होती हैं . सभी को incineration plant मे जलाकर या भस्मिकरण किया जाता है. एवं waste to compost (खाद ) कन्वर्ट करके उपयोग किया जाता है. परन्तु waste Electricity generation  मे बहुत सी मूल्यवान एवं उपयोगी चीज़ो जलाने से संसाधनों का संरक्षण नहीं हो पा रहा है. से बहुत अधिक अपशिष्ट और पैदा हो रहे हैं. जहां भी वेस्ट को आ जाता है. वहां पर इसकी recycling या reuse रेट बहुत कम है.

    वेस्ट जलाने से पैदा होता है प्रदूषण और जहरीला शहर Burning waste produce pollution and toxic city

     विश्व चलाना पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए हानिकारक है . कि कचरे को जलाकर का वेस्ट और उससे पैदा होने वाली गैस इसको मिट्टी हवा और पानी में उड़ कर उसे दूषित कर सकती हैं . वातावरण में यह गैस मानव के शरीर मे बहुत सी बीमारियां पैदा कर सकती है . कई लोगों की मौत का कारण बन सकती है. कचरे से जलाने वाली ऊर्जा जलवायु में CO2 की मात्रा को उत्सर्जित करते हैं वायु को प्रदूषित करते हैं. हमें ग्रीन हाउस इफेक्ट के परिणाम देखने पड़ सकते हैं.

    वेस्ट टू फ्यूल तकनीक उपयोगी है या नहीं(Waste to fuel technology is useful or not)

    WET के द्वारा ऊर्जा उत्पादन मे हम बहुत सी सामग्री को खराब कर देते हैं. हार बनाने की प्रक्रिया और recycling Technology कचरे को जलाने से उत्पन्न ऊर्जा को 5 गुना तक बचाया जा सकता है. हम कह सकते हैं , कि waste to fuel technology बहुत ज्यादा प्रभावी नहीं है. बल्की हो सकता है इसके भयानक परिणाम हमें भविष्य मे देखने पड़े.

    (WET)वेस्ट से बिजली उत्पन्न करने वाली प्रौद्योगिकी (Waste to Electricity generate Technology)

     दशकों से विकसित और कार्यान्वित की गई है। सबसे मजबूत तकनीक ‘moving to great and  Mars burn technique ‘ तकनीक है जिसमें मूविंग ग्रेट की विशेषता होती है जो फीड शाफ्ट से ऐश पिट तक जाने वाले ग्रेट पर म्यूनिसिपल सॉलिड वेस्ट (MSW) को जलाता है। मूविंग ग्रेट तकनीक को एमएसडब्ल्यू के प्रीट्रीटमेंट या सॉर्टिंग की आवश्यकता नहीं होती है, जिससे यह बड़ी मात्रा में और अपशिष्ट संरचना और कैलोरी मान की विविधता को समायोजित कर सकता है। मिश्रित MSW उपचार के संचालन के सिद्ध ट्रैक रिकॉर्ड के साथ, प्रौद्योगिकी का उपयोग एक सदी से भी अधिक समय से किया जा रहा है.

    भारत में वेस्ट प्लांट का भविष्य( WET Plant future in india)

    अर्बन डेवलोपमेन्ट वालो क़े लिए,waste को समाप्त करना सबसे अच्छा तरीका है . इसे जलाने और बिजली का उत्पादन करने के लिए है .

    • ऊर्जा बनाने के लिए जलते कचरे का सिल्वर -बुलेट ।
    • तब तक काम नहीं करेगा जब तक कि कचरे को व्यवस्थित करके अलग नहीं किया जाता है।
    • डब्ल्यू-टी-ई संयंत्र बंद हो रहे है, क्यूंकि ऊर्जा बनाने कि रेट बहुत ज्यादा आ रही है ।
    • पौधों द्वारा प्राप्त कचरे की गुणवत्ता है, बहुत ज्यादा होती है . और इसका उपयोग बहुत से छोटे उद्योगो मे हो रहा है . परन्तु कचरे कि गुणवतत्ता का उपयोग नहीं हो पा रहा हैं.

    कचरे को अलग करने क़े लिए कोई मशीने नहीं हैं . इसलिए कचरे को गुणवत्ता क़े आधार पे अलग किया जाना आवश्यक हैं , प्लास्टॉक, लकड़ी, कागज, गत्ता या प्राकृतिक कचरा.इस सभी कि छटनी करना अति आवश्यक हैं. जिससे इनका उपयोग हर प्रकार से हो सके.

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     भारत में वेस्ट से ऊर्जा संयंत्र की लागत (waste to Energy Plant cost in India)

     इंडिया में WET Plant project की कॉस्टिंग निश्चित नहीं है . क्योंकि यह सरकार और तकनीकी समाधान प्रदाताओं के बीच डील पर निर्भर करता है . इस में लगने वाले शुल्क जिस राज्य सरकार केंद्र सरकार द्वारा तय किया जाता है . जो हर राज्य में अलग-अलग हो सकता है. .सामान्य तौर पर Tipping fee भी कहा जाता है, जिसकी शुल्क अनिश्चितता के कारण निश्चितखर्चे का अनुमान लगाना मुश्किल होता है.

     यदि फिर भी अगर किसी प्लांट को तैयार के एक सामान्य खर्चों की बात की जाए .तो गैस कचरे से Energy Plant 15 से 18 करोड़ /मेगावाट तक खर्चा आता है. उससे प्राप्त इलेक्ट्रिसिटी 12 से 14 रूपये /किलोवाट पड़ती है. इस कारण से इन प्लांटों को लगाना बहुत महंगा पड़ता है.यदि कोयला और सोलर बात की जाए उससे हमें ₹2 -10 rs/kwh इलेक्ट्रिसिटी प्राप्त हो जाती है. परन्तु अभी भी कई राज्यों मे ये plant लगाए जा रहे है.और इसकी कॉस्ट को कम करने का प्रयास किया जा रहा है .

     इंदौर म्युनिसिपल कॉरपोरेशन का WET प्लांट नई परियोजना बनाई है. परंतु इसके  स्थापना कि लागत क़े कारण ये परियोजना फैल हो गयी है. नगर निगम से प्राप्त कचरे से 10ं MW का प्लांट लगाने कि लागत 100 करोड़ से ज्यादा आएगी. और इसके maintinenace  कि लागत ही हर साल 10 करोड़ आएगी. इस प्रकार इस प्रोजेक्ट कि लागत बहुत ज्यादा होने से यह ठंडे बस्ते मे चली गयी.

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