Mon. Oct 3rd, 2022

भारत का स्टॉक मार्केट तेजी से आगे बढ़ रहा है . और पिछले कुछ सालो में देश में स्टॉक मार्किट में निवेश करने वाले लोगो की संख्या भी काफी तेजी से बढ़ी हैं। लेकिन इस स्टॉक मार्केट में निवेश करने वाले अधिकतर लोगों को शुरुआत में अच्छे से नुकसान को झेलना पड़ता हैं जिसका मुख्य कारण कम्पनियो और बाजार की पर्याप्त जानकारी ना होना, और अनुभव की कमी भी होती हैं। स्टॉक मार्केट में अच्छा मुनाफा कमाने के लिए आईपीओ में निवेश किया जाता हैं, और सभी अनुभवी मार्केटर IPO में निवेश करने से पहले GMP Price की जानकारी लेते हैं . और उसका आकलन करते हैं।अगर आप भी स्टॉक मार्केट में निवेश करना शुरू कर रहे हो या फिर ,किसी आईपीओ में निवेश करने वाले हो तो आपको GMP Price के बारे में पर्याप्त जानकारी होनी चाहिए।

अगर आप GMP Price के बारे में नहीं जानते तो यह लेख पूरा पड़ेगी कि इस लेख में हम आपको ‘GMP Price क्या होता हैं’, ‘GMP Price कैसे केलकुलेट करते हैं’, ‘GMP Price का महत्व क्या हैं’, ‘GMP Price Risk और Authenticity क्या होता हैं’ जैसे सभी सवालो का जवाबी देते हुए ‘GMP की पूरी जानकारी’ आसान भाषा में देंगे।

Table of Contents

    GMP की फुल फॉर्म क्या होती हैं?

    किसी भी चीज के बारे में जानने से पहले सबसे पहले उसके सटीक नाम को जाना जाता हैं. GMP एक शार्ट फॉर्म है ,और इसकी एक फुल फॉर्म मौजूद हैं. दरअसल GMP का पूरा नाम अर्थात GMP की फूल फॉर्म Grey Market Premium होती हैं . ग्रे मार्किट प्रीमियम को सामान्य भाषा में GMP (जीएमपी) कहा जाता हैं।

    GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) क्या होता हैं?

    जब भी किसी कम्पनी का आईपीओ आता हैं . और उसके ग्रे मार्केट प्रीमियम के बारे में एक्सपर्ट्स आदि के द्वारा बात की जाती हैं और साथ ही जो लोग स्टॉक मार्केट की अच्छी समझ और अनुभव दोनों रखते हैं . उनके द्वारा आईपीओ में निवेश से पहले स्टॉक के ग्रे मार्केट प्रीमियम का आंकलन किया जाता है और उसके बाद ही वह तय करते हैं की आखिर कम्पनी में पैसा निवेश करना चाहिए या नहीं। तो अब बात आती हैं की आखिर यह ग्रे मार्केट प्रीमियम है क्या जो इतना जरुरी हैं।

    GMP Calculate

    दरअसल आईपीओ (इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग) के द्वारा कम्पनी के स्टॉक्स को पहली बार लोगो के लिए पेश किया जाता हैं . तो इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग के बाद जितने समय तक कम्पनी के स्टॉक्स सामान्य तौर पर बाजार में नहीं आते . तब तक उनकी Grey Market में ट्रेडिंग चलती है। इसी ट्रेडिंग के आधार पर एक प्रीमियम राशि तय होती है और आईपीओ कीमत से ऊपर की ग्रे मार्केट प्रीमियम को चुकाकर ग्रे मार्केट से स्टॉक को ख़रीदा जाता हैं।

    अगर इससे सम्बंधित सामान्य उदाहरण की बात की जाये तो मान लीजिये . आज के सामान्य में किसी कम्पनी का आईपीओ आता है ,और उसकी कीमत 50 रूपये रहती है। आईपीओ के आने के बाद स्टॉक मार्केट में शेयर के आने से पहले ही उसे खरीदने बेचने की प्रक्रिया अर्थात ट्रेडिंग शुरू हो जाती हैं जिसके आधार पर ग्रे मार्केट प्रीमियम तय किया जाता हैं। ऐसे में अगर उस कम्पनी के शेयर का ग्रे मार्किट प्रीमियम 5 रूपये है तो उस शेयर को ग्रे मार्केट से ख़रीदने के लिए आपको 55 रूपये देने होंगे।

    ग्रे मार्केट क्या होता है और क्या यह लीगल हैं? (What is gray market and is it legal )

    कम्पनियो के स्टॉक्स मुख्य रूप से प्राइमरी मार्केट और सेकंडरी मार्केट में ट्रेड होते हैं जिसमें आईपीओ के द्वारा इश्यू किये गए शेयर्स को प्राइमरी मार्केट में ट्रेड किया जाता है . तो वही दूसरी तरफ शेयर्स के इश्यू हो जाने के बाद जब वह मार्केट में लिस्ट हो जाते है, तो फिर वह सेकंडरी मार्केट में आ जाते हैं। लेकिन इन दोनों मार्केट में ट्रेडिंग शुरू होने के पहले शेयर्स प्रे ग्रे मार्केट में ट्रेडिंग होती है जो एक अनऑफिशियल मार्केट होता हैं।

    ग्रे मार्केट में ग्रे शब्द का मतलब ‘अनऑफिशियल’ से होता हैं , यानि की यह ना तो ब्लैकमार्केट अर्थात इलीगल मार्केट हैं , और ना ही वाइट अर्थात आधिकारिक मार्केट हैं। ग्रे मार्केट कोई इलीगल मार्केट नहीं है , लेकिन इसको लेकर SEBI के द्वारा कोई रूल्स और रेगुलेशंस नहीं बनाये गए हैं जिसकी वजह से यह एक आधिकारिक मार्केट भी नहीं है , इसी लिए इस मार्केट को ग्रे मार्केट कहा जाता हैं। ग्रे मार्केट में आईपीओ के दौरान ही ट्रेडिंग शुरू हो जाती है।

    ग्रे मार्केट प्रीमियम कैसे कैलकुलेट की जाती हैं ?

    अगर आज स्टॉक मार्केट में पैसा कमाना चाहते हो, और इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग में निवेश करके बेहतरीन रिटर्न्स प्राप्त करना चाहते हो ,तो उसके लिए आपको आपको पता होना चाहिए की ग्रे मार्केट प्रीमियम को कैसे कैलकुलेट किया जाता हैं क्युकी अगर आप ग्रे मार्केट प्रीमियम को कैलकुलेट करने की प्रोसेस सीख जाओगे तो आपको किसी भी कंपनी के आईपीओ की असली वैल्यू को पहचानने में मदद मिलेगी जिससे आप सटीक रूप से निवेश करके अच्छा पैसा बना पाओगे।

    ग्रे मार्किट प्रीमियम को भी सामान्य तौर पर प्राइमरी और सेकंडरी मार्केट की तरह कैलकुलेट किया जाता है . अर्थात इसमें भी डिमांड और सप्लाई का रूल लागु होता हैं। अगर ग्रे मार्केट में स्टॉक की सप्लाई ज्यादा है, और डिमांड कम हैं तो प्रीमियम कम होगा और कई मामलो में नेगेटिव में भी चले जाएंगे लेकिन अगर ग्रे मार्केट में स्टॉक की डिमांड ज्यादा है और सप्लाई कम हैं तो ग्रे मार्केट प्रीमियम बढ़ेगा और इसी के आधार पर ग्रे मार्केट में शेयर की कीमत भी घटती और बढ़ती है।

    ग्रे मार्केट में ट्रेडिंग क्यों की जाती हैं ? (Why trading in the gray market)

    किसी भी कंपनी के द्वारा जब स्टॉक्स की इनिशियल पब्लिक आफरिंग की जाती है . तो कई मामलों में तो इनिशियल पब्लिक आफरिंग के बाद जब स्टॉक मार्केट में लिस्ट होता है , तो उसकी कीमत काफी बढ़ जाती है तो कई मामलों में स्टॉक की कीमत घटती जाती है। ऐसे में स्टॉक से कम समय में फायदा कमाने के लिए या फिर अपना होने वाले नुकसान डालने के लिए उसके मार्केट में लिस्ट होने से पहले ही उसकी ट्रेडिंग शुरू कर दी जाती है। यही कारण हैं की ग्रे मार्केट में ट्रेडिंग होती हैं।

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    ग्रे मार्केट प्रीमियम का महत्व क्या हैं ? (What is the Importance of Gray Market Premium)

    कई मामलो में ग्रे मार्केट को काफी ज्यादा प्रॉफिटेबल माना जाता है , तो कई मामलो में यह काफी नुक्सानदायी भी साबित होता है. इसके अलावा क्युकी यह अनऑफिशियल मार्केट हैं, तो इसमे ट्रेडिंग आदि करना भी कम ही लोग पसंद करते हैं। लेकिन ग्रे मार्किट प्रीमियम फिर भी काफी महत्त्व रखता हैं। क्युकी ग्रे मार्केट में आईपीओ के दौरान और यहां तक की अलॉटमेंट से भी पहले ट्रेडिंग शुरू हो जाती हैं, तो इससे स्टॉक की वैल्यू और निवेशकों की स्टॉक में रूचि के बारे में पता लगता हैं. जिससे यह तय करने में मदद मिलती हैं . की आईपीओ में निवेश करना चाहिए या नहीं और अगर करना चाहिए तो कितना। यानि की ग्रे मार्केट का एनएलईजेशन आपके लिए काफी प्रॉफिटेबल साबित हो सकता हैं।

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