Mon. Oct 3rd, 2022

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) द्वारा लोन ट्रांसफर कि नयी गाइडलाइन जारी कि गयी. ये गाइडलाइन्स सभी govt bank,  private banks और सभी NBFC संस्थाओ स्माल फाइनेंस बैंक,, नाबार्ड, SIDBI, एन एच बी, एक्सिम बैंक, हाउसिंग फाइनेंस कि सभी कम्पनी क़े लिए जारी कि गयी.

RBI द्वारा लोन ट्रांसफर को लेकर मास्टर डायरेक्शन जारी किया गया. आम तोर loan transfer बैंक्स और अन्य फाइनेंसियल फर्म्स द्वारा financial liquidity को मैनेज करता है .और उनके स्ट्रेटजिक sales और लोन एक्सपोज़र को भी संतुलित करने का प्रयास करता है. मास्टर निदेश में विभिन्न श्रेणियों के ऋणों के लिए न्यूनतम धारण अवधि भी निर्धारित की गई है. (एएफपी से प्रतिनिधि छवि) मास्टर निदेश ने विभिन्न श्रेणियों के ऋणों के लिए न्यूनतम धारण अवधि भी निर्धारित की है। 

लोन ट्रांसफर की नियमों में बदलाव RBI द्वारा

लोन ट्रांसफर नए नियम {loan transfer new rules in Hindi}

मेंमास्टर डायरेक्शन में उल्लेख किया गया है, “एक लोन ट्रांसफर के परिणामस्वरूप ट्रांसफर को ऋण से जुड़े रिस्क और रीवार्ड्स से तत्काल अलग करना चाहिए, जिस सीमा तक आर्थिक ब्याज ट्रांसफर किया गया है.लोन ट्रांसफर एग्रीमेंट मे लोन ट्रांसफर करवाने वाले और लोन ट्रांसफर करने क़े बीच लोन ट्रांसफर से मूलधन (Principal)और ब्याज (interest) आय का वितरण स्पष्ट रूप उल्लिखित होना चाहिए से होना चाहिए.”

यह नया जनादेश इन ऋण ट्रांसफर लेनदेनों के लिए एक व्यापक और बोर्ड द्वारा पारित नीति को लागू करने के लिए बैंकों और अन्य उधार देने वाली संस्थाओं(NBFC, small स्केल बैंक, नाबार्ड, Sidbi ) कि जरूरतों को पूरा करता है.

इन दिशानिर्देशों में, अन्य बातों के साथ-साथ, उचित परिश्रम, मूल्यांकन, डेटा ,स्टोरेज और मैनेजमेंट के लिए अपेक्षित आईटी सिस्टम, रिस्क मैनेजमेंट , आवधिक बोर्ड (periodic board) स्तर की निगरानी आदि से संबंधित न्यूनतम मात्रात्मक(Quantitative )और गुणात्मक(Qualitative) स्टैंडर्ड को निर्धारित किया जाना चाहिए.

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आरबीआई ने कहा,”भारतीय रिजर्व बैंक (प्रूडेंशियल फ्रेमवर्क फॉर रेजोल्यूशन ऑफ स्ट्रेस्ड) के तहत एक समाधान योजना के एक हिस्से के अलावा, एक हस्तांतरणकर्ता( transferor )एक loan रिस्क को पूरी तरह या आंशिक रूप से प्राप्त नहीं कर सकता है. जिसे पहले इकाई द्वारा ट्रांसफर किया गया था। संपत्ति) निर्देश, 2019 या दिवाला और दिवालियापन संहिता, 2016 के तहत अनुमोदित समाधान योजना के हिस्से के रूप में.

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